तीनों मौसम में कमाई देती है मूंग की खेती, कम समय और लागत में होगा बम्पर मुनाफा, जानिए

तीनों मौसम में कमाई देती है मूंग की खेती, कम समय और लागत में होगा बम्पर मुनाफा, जानिए

मूंग की खेती: मूंग का खास गुण है कि यह मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा को बढ़ा देती है, जिससे अगली फसलों का उत्पादन बेहतर हो जाता है. भारत में मूंग की दाल को हरी दाल के नाम से भी जाना जाता है. यह एक प्रमुख दलहन है, जो कृषि में अहम भूमिका निभाती है. मूंग की खेती कम लागत और कम समय में खरीफ, रबी और ज़ायद तीनों ही मौसम में आसानी से की जा सकती है. ऐसे में रबी की फसल कटने के बाद खाली पड़े खेतों में किसान मूंग की खेती कर सकते हैं।

यहाँ से खरीदें मूंग के बीज

किसानों की सुविधा के लिए नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन उन्नत किस्म MH-1142 के बीज ऑनलाइन बेच रही है. आप इस बीज को ओएनडीसी के ऑनलाइन स्टोर से खरीद सकते हैं. यहां किसानों को कई अन्य प्रकार की फसलों के बीज भी आसानी से मिल जाएंगे. किसान इसे ऑनलाइन ऑर्डर कर घर बैठे ही मंगवा सकते हैं।

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मूंग की किस्म और विशेषता

चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय, हिसार द्वारा मूंग की MH-1142 किस्म को विकसित किया गया है. यह किस्म 63 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है. इस किस्म की पैदावार क्षमता 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. खरीफ में इसकी बुवाई का उपयुक्त समय जून से जुलाई तक का है. इस किस्म की खासियत यह है कि इसकी फसल मोज़ेक, पत्तियों की जंग और पत्तियों के सिकुड़ने जैसी खतरनाक बीमारियों से ग्रसित नहीं होती है. इसके अलावा सफेद पाउडरी जैसी फफूंद जनित रोगों का भी इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है. साथ ही इस किस्म की पैदावार क्षमता भी बेहतर है. उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड में बुवाई के लिए यह किस्म अच्छी मानी जाती है।

मूंग की किस्म की कीमत

अगर आप भी मूंग की MH-1142 किस्म की खेती करना चाहते हैं तो बता दें कि वर्तमान में नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन की वेबसाइट पर 4 किलो का पैकेट MH-1142 किस्म का बीज 33 प्रतिशत की छूट के साथ 720 रुपये में उपलब्ध है. इसे खरीदकर आप आसानी से मूंग की खेती कर अच्छी कमाई कर सकते हैं।

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खेत तैयार करने का तरीका

मूंग की खेती के लिए खेत की तैयारी बहुत जरूरी है. खेत की दो से तीन बार जुताई करें. इसके बाद मिट्टी के ढेले तोड़ने और खरपतवार नाश के लिए हल्की जुताई करें. मूंग की दाल के बीज बोने की विधि में मौसम का भी ध्यान रखना चाहिए. खरीफ की बुवाई के लिए पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेमी रखने की सलाह दी जाती है।